Sharukh khan v/s APJ Abdul Kalam v/s Prof. Anil K. Gupta v/s
Sam Pitrda !
अब आप भी ये सोच रहे होंगे की ये कंहा की ईंट कंहा का रोड़ा और भानुमती
ने ये केसे कुनबा जोड़ा ?
जनाब ये इंडिया है यंहा कूछ भी - कभी भी - केसे भी हों सकता है , जब
सैम पित्रोदा जेसे आदमी को सरकार इन्नोवेसन फंड बनाने के लिए एक खरब डॉलर दे सकती
है --- तो ------------ तो कुछ भी हों
सकता है
सूना है की शाहरुख खान साहेब को अमेरिकन सरकार ने पूरा दो घंटा एयेर
पोर्ट पर रोक कर रखा , और वो बहुत खफा भी हों गए थे – होना जायज़ भी है की भाई इक
पूरी की पूरी फिल्म बना डाली इसी रोकाटोकी को लेकर की “ माई नेम इस खान “ – एंड आई
ऍम नोट अ टेररिस्ट -- अब मिंया वो अमरीका
वाले नहीं मानते ना ! वो तो कलाम साहेब के भी जेकेट और जूते उतरवाकर चेक करते रहे
हैं --- आपकी तो ओकात क्या है ? वैसे आपका क्या – क्या उतरवाया था शाहरूख भाई ?
सूना है की अंडरविअर तो आप पहनते ही नहीं हैं ?
ख़ैर भइया जिस कंट्री की इतनी बड़ी दो – दो बिल्डिंग्स को किसी ने यूं
ही झटके में गिरा दिया हो – हज़ारों लाखो को टिड्डीक से खत्म कर दिया हो------ वो
दो घंटे क्या दो दिन भी रोक कर रखें तो कोई हर्ज नहीं होना चाहिए ! बी सपोर्टिव
यार ! वैसे आविष्कारकों को वंहा भी कोई ज्यादा मदद नहीं मिलती, मिलती होती तो ये
ना होता जो हू़या, केसी शर्मनाक बात है की आतंकवादियों की फंडिंग आविष्कारकों के
मुकाबले कंहीं ज़्यादा है , जेसे की गंजो की दवा पर मलेरिया के मुकाबले दस गुना
ज़्यादा खर्च होता है !
वो क्या है ना की इन सब बातों से इस बात को बल मिलता है की तुम अगर आज
आविष्कारकों की नहीं सुनोगे तो कोई और ओसामा बिन लादेन टाइप सुनेगा , कलाम साहेब
चाहे कितना ही बोलते रहें पर ये सैम पित्रोदा या प्रोफ़ेसर अनिल गुप्ता जेसे लोग
मानते ही नहीं , और मानते भी हैं तो अपनी ही टर्म्स और कंडीशन पर , अब सैम अंकल को
लगता है की जब तक पूरा भारत इंग्लिश नहीं जान जाता तब तक तरक्की नही हों सकती , तो
अंकल इन अंग्रेजों के आने के पहले भारत सोने की चिड़िया क्यों और केसे कहलाता था ?
ये संस्कृत जानने वाले मूर्ख इतने बड़े – बड़े सोने के जेवरात इत्यादि केसे पहनते थे
? रावण सोने की लंका में क्या इंग्लिश में बोलता था --- हू इस दिस राम ?
क्या आप जानते हैं की फिल्म थ्री इडियट ने पूरे इंडिया सहित हम
आव्श्कार्कों को भी उल्लू बनाया था , प्रोफ़ेसर अनिल गुप्ता को भी, और अब सरकार ने
पूरे एक खराब डॉलर देकर सैम अंकल को कहा है की जाओ जब तक ये बन सकते हों बनाते रहो
! कम से कम दस साल तक तो बनाओ यार, इन्नोवेशन डेकेड मनाओ ! प्रोफ़ेसर अनिल गुप्ता
जी ने मुझ से व्यक्तिगत रूप से कहा है की उनका इससे कुछ भी लेना देना नहीं है – तो
फिर किसका है भाई -- ? उनकी वेबसाईट पर फोटो
तो लगी है आपकी – पता नहीं क्या राम कहानी है ? .... हू इस दिस राम ? ये सब शाहरूख
की ही राम कहानी लगती है – पर उनकी तो सिर्फ कहानी थी, भूत वाली कहानी ! ये वही
भूत है जो तब तक एबटाबाद की पहाड़ियों में छुपा था जब तक की ओबामा साहेब को भूत और
प्रेतों पर विशवास नहीं था – जब हू़या – तो गई भेंस पानी में !
वैसे प्रोफ़ेसर अनिल गुप्ता जी के पास कई इसे लोग हैं जी की पानी में
से भेंस बाहर निकाल लाते हैं – पर फंडिंग होनी चाहिए !
आपका
नई दिल्ली से
अगस्त्य